फिर से अपने भारत को महान एक बार तुम बनाओ ना। फिर से अपने भारत को महान एक बार तुम बनाओ ना।
एक ग़ज़ल...। एक ग़ज़ल...।
खिड़की...। खिड़की...।
सूरज की किरण...। सूरज की किरण...।
कुछ साँसें...। कुछ साँसें...।
कमल तेरी फिज़ूल कलम से...। कमल तेरी फिज़ूल कलम से...।